- Netizens hail Varun Dhawan’s acting in Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai call it a ‘Paisa Vasool Entertainer'
- June Calls for a Laugh: The Best Comedy Titles to Stream on Netflix
- एका मोबिलिटी ने पुणे प्लांट से 1,000वें एससीवी को हरी झंडी दिखाई
- मोटोरोला ने लॉन्च किया edge 70 pro+, जो 2026 का सबसे स्टाइलिश फ्लैगशिप किलर स्मार्टफोन है
- जावेद जाफरी ने सरोज खान को दिया श्रेय, कहा उन्होंने सिखाया कि डांस में एक्सप्रेशन कितनी अहम है
आकाश हेल्थकेयर ने की अन्वका फाउंडेशन के साथ मिलकर पिंक बोन्स” की घोषणा, हड्डियों की विकृति वाले बच्चों के जीवन में बदलाव के लिए देशव्यापी पहल की शुरुआत
हड्डी विकृति पहल’ का उद्देश्य 16 वर्ष तक की आयु के वंचित बच्चों को निःशुल्क उपचार और पुनर्वास प्रदान करना है
भारत के वंचित बच्चों में हड्डियों की विकृति के संकट को दूर करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम के रूप में आकाश हेल्थकेयर ने अन्वका फाउंडेशन के साथ साझेदारी में “पिंक बोन्स: डिफॉर्मिटी फ्री किड्स कॉम्यूनिटी” शुरू किया है। इस कार्यक्रम के जरिये जन्मजात और आर्थोपेडिक समस्याओं से जूझ रहे 16 वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक पहचान से लेकर सर्जरी के बाद पुनर्वास तक निःशुल्क चिकित्सा देखभाल करने की जिम्मेदारी निभाने का वादा किया है।
हाल ही में शुरू की गई इस पहल ने एक 9 वर्षीय बच्चे जो कभी गंभीर रूप से विकृति यानी टेढ़े-मेढ़े पैरों के कारण व्हीलचेयर तक ही सीमित था, को चलने-फिरने में योग्य बनाया। इस पहल के बाद बच्चे के जीवन में यह एक परिवर्तनकारी क्षण था। बच्चे की पैरों पर खड़े होने की यात्रा पूरे भारत में हजारों बच्चों के लिए आशा का प्रतीक है। अपने माता-पिता और आकाश हेल्थकेयर के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. आशीष चौधरी के बगल में खड़ी होकर मुस्कुराते हुए बच्ची ने कहा “मुझे खुशी है कि मैं अब चलने में सक्षम हूं और कुछ महीनों के भीतर मैं अपने दोस्तों के साथ खेल पाऊंगी”।
यह पहल क्यों है महत्वपूर्ण
भारतीय ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अनुसार, बच्चों में हड्डियों की विकृति, क्लबफुट जैसी जन्मजात स्थितियों से लेकर ऑस्टियोकॉन्ड्रोडिस्प्लासिया, स्कोलियोसिस और ऑस्टियोजेनेसिस इम्पर्फेक्टा जैसी पोस्ट-ट्रॉमेटिक विकृतियों तक भारत में हर 300 बच्चों में से 1 को प्रभावित करती है। सीमित जागरूकता, गरीबी और अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 70 फीसदी मामलों का इलाज नहीं हो पाता है, जिससे अक्सर बच्चे आजीवन विकलांगता के शिकार हो जाते हैं। कुपोषण इस समस्या को और भी गंभीर बना देता है, क्योंकि निम्न आय वाले समुदायों में बाल चिकित्सा में होने वाले अस्थि विकारों में 35 फीसदी मामलों में विटामिन डी की कमी जिम्मेदार होती है।
आकाश हेल्थकेयर के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विक्रम खन्ना ने कहा कि ये स्थितियां विशेष रूप से वंचित समुदायों के बच्चों के बीच महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का कारण बन सकती हैं। “बच्चों में हड्डियों की विकृति विभिन्न कारकों, जैसे चोट, संक्रमण या आनुवंशिक स्थितियों से उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा, ये विकृतियां न केवल बच्चे के शारीरिक विकास में बाधा डालती है, बल्कि चलने, दौड़ने, खेलने या लिखने जैसी रोज़मर्रा की गतिविधियों को करने की उनकी क्षमता को भी प्रभावित करती है। इसका प्रभाव शारीरिक सीमाओं से परे होता है, जो उनके भावनात्मक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। हालांकि, जल्दी पता लगाने और समय पर इलाज से प्रभावित बच्चों के जीवन की गुणवत्ता और समग्र कल्याण में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है,”।
आकाश हेल्थकेयर की अभूतपूर्व हड्डी विकृति पहल के पीछे व्यक्तिगत दर्द की कहानी है जिसने डॉ. चौधरी को एक मरीज से एक अग्रणी में बदल दिया, जिसने अपने संघर्षों को दूसरों की मदद करने के मिशन में बदल दिया। क्लबफुट के साथ जन्मे इस बच्चे ने लगभग चलने की क्षमता खो दी थी, लेकिन वह अपने माता-पिता की पीड़ा को देखते हुए बड़ा हुआ, जो इसका इलाज खोजने के लिए बेताब थे, लेकिन उन्हें सिर्फ भ्रम और गलत सूचना ही मिली। वे एक डॉक्टर से दूसरे डॉक्टर के पास जाकर जवाब खोजते रहे, लेकिन उन्हें गलत निदान और असफल उपचार का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी हालत और खराब हो गई। दिल्ली में मिली खराब अनुभव के बाद ही उन्हें आखिरकार सही उपचार मिला, जिसमें दो साल तक विशेष देखभाल और सुधारात्मक सर्जरी का संयोजन था।
डॉ. चौधरी ने कहा, यह पहल मेरे लिए बेहद व्यक्तिगत है, क्योंकि मैंने भी उस आघात का दर्द महसूस किया है। ऐसी स्थितियों के साथ पैदा हुए बच्चों के लिए देरी से या अनुचित उपचार के परिणाम शारीरिक सीमाओं से कहीं आगे तक फैल जाते हैं। यह उनके आत्मविश्वास, दोस्ती बनाने, करियर बनाने और बड़े होने पर सार्थक रिश्ते बनाने की उनकी क्षमता को प्रभावित करता है। वे अलग-थलग और अयोग्य महसूस करते हैं, क्योंकि उन्हें सही समय पर सही देखभाल से वंचित किया गया। किसी भी बच्चे को इस तरह से पीड़ित नहीं होना चाहिए, खासकर जब हमारे पास इसे रोकने के लिए ज्ञान और साधन हों। जागरूकता और उपचार तक पहुंच सब कुछ बदल सकती है। हर बच्चे को दर्द और कलंक से मुक्त बचपन का हक है और अगर मैं ऐसा करने में एक छोटा सा हिस्सा भी बन सकता हूं तो यह समाज को वापस देने का मेरा तरीका है,”। उन्होंने जोर देकर कहा, “बच्चे का चलने में असमर्थ होना सिर्फ़ एक चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि परिवारों के लिए एक सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक संकट है। हमारा लक्ष्य समय पर हस्तक्षेप करके इस चक्र को तोड़ना है।”
हड्डी की विकृति का शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन के महत्व के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए सामुदायिक आउटरीच में शामिल होना।
निःशुल्क उपचार: जटिल सर्जरी, विकृत अंगों का सुधार और उन्नत उपचार शून्य लागत पर प्रदान किए जाएंगे
पुनर्वास और अनुपालन:
उपचार के बाद फिजियोथेरेपी सहायक उपकरण और अनुवर्ती प्रणाली से स्थायी सुधार सुनिश्चित होगा।
लॉन्च हुए इस इवेंट के दौरान बच्चे की मां ने अपने दशक भर के संघर्ष को याद किया और आकाश हेल्थकेयर की समर्पित चिकित्सा टीम को धन्यवाद दिया। बच्ची की मां ने कहा, “हम उसे ठीक करवाने के लिए कई अस्पतालों में गए। कुछ के पास सुविधाएं नहीं थीं जबकि अन्य ने पैसे मांगे जो हम वहन नहीं कर सकते थे। हमने उसके इलाज के लिए अपनी ज़मीन बेच दी, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया। जब आकाश हेल्थकेयर आगे आया, तो उन्होंने न केवल उसके पैरों को ठीक किया, बल्कि उसे चलने-फिरने लायक भी बनाया। आकाश हेल्थकेयर ने उसे बचपन का तोहफ़ा दिया है।


